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Braj Ke Sant Gita press Gorakhpur भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा

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Description

भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह पुस्तक पद रत्नाकर के शास्त्रीय और आध्यात्मिक पहलुओं का गहन विश्लेषण करती है। लेखक ने इसमें भक्ति

के उच्चारण से कृष्ण-प्राप्ति" में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के नाम-स्मरण की महिमा को अत्यंत सरस और सहज भाषा में प्रस्तुत किया है। इस ग्रंथ में स्वामी जी ने यह स्पष्ट किया है कि केवल "कृष्ण" नाम के प्रेमपूर्वक उच्चारण मात्र से ही साधक को भगवान की कृपा प्राप्त हो सकती है। यह पुस्तक भक्तों के लिए न केवल नाम-स्मरण का मार्गदर्शन है

स्वामी रामसुखदास जी महाराज रचित एक प्रसिद्ध हिंदी ग्रंथ है। इसमें श्रीमद्भगवद्गीता के गूढ़ और गहरी भावनाओं को प्रश्न–उत्तर शैली में सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है ताकि सामान्य पाठक भी इसे सुगमता से समझ सकें । यह पुस्तक लगभग 160 पृष्ठों की पेपरबैक होती है और गीता के उपदेशों को दैनिक जीवन तथा मोक्ष-मार्ग में उपयोगी उपायों के रूप में समझाने का लक्ष्य रखती है । यह संस्करण एक सार्वभौमिक ग्रंथ के रूप में प्रतिष्ठित है

ऋषि वंश

जिसे 'हरिवंश पुराण' के नाम से जाना जाता है

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